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शुगर क्या होता है? जानिए कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार

आज के समय में शुगर (Diabetes) एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। यदि समय पर इसकी पहचान और उचित देखभाल न की जाए, तो यह हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं शुगर क्या है, इसके कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में।

शुगर (Diabetes) क्या होता है?

शुगर या डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर रक्त में मौजूद ग्लूकोज (Sugar) का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसका मुख्य कारण इंसुलिन हार्मोन की कमी या इंसुलिन का सही ढंग से कार्य न करना होता है।
इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा बनाया जाता है और रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

शुगर के मुख्य प्रकार

  1. टाइप 1 डायबिटीज :- इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।
  2. टाइप 2 डायबिटीज :- यह सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
  3. गर्भावधि डायबिटीज (Gestational Diabetes) :- यह गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में विकसित हो सकती है।

शुगर होने के प्रमुख कारण

  1. अनियमित खान-पान :- अधिक मीठा, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन।
  2. शारीरिक गतिविधि की कमी :- व्यायाम न करना और लंबे समय तक बैठे रहना।
  3. मोटापा :- अधिक वजन टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है।
  4. आनुवंशिक कारण :- परिवार में डायबिटीज का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
  5. तनाव :- लगातार मानसिक तनाव रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकता है।

शुगर के शुरुआती लक्षण

यदि निम्न लक्षण दिखाई दें, तो जांच करवाना उचित हो सकता है:

  • बार-बार प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • अत्यधिक भूख लगना
  • थकान और कमजोरी
  • वजन कम होना
  • धुंधला दिखाई देना
  • घाव का देर से भरना
  • त्वचा में खुजली या संक्रमण
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी

शुगर की जांच कैसे होती है

डॉक्टर निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं:

  • Fasting Blood Sugar (FBS)
  • Post Prandial Blood Sugar (PPBS)
  • HbA1c Test
  • Random Blood Sugar Test

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” के अंतर्गत वर्णित किया गया है। आयुर्वेद संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या, योग और जीवनशैली सुधार पर विशेष बल देता है।
आयुर्वेदिक देखभाल में शामिल हो सकते हैं:

√ संतुलित एवं नियंत्रित आहार
√ नियमित योग एवं प्राणायाम
√ वजन नियंत्रण
√ विशेषज्ञ की सलाह अनुसार आयुर्वेदिक औषधियां
√ तनाव प्रबंधन
√ किसी भी उपचार या औषधि का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।

शुगर रोगियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवाएं।
  • मीठे और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
  • रोजाना व्यायाम करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • तनाव को नियंत्रित रखें।
  • डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाइयों का सेवन करें।

श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान में शुगर रोगियों के लिए आयुर्वेदिक परामर्श

श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान में शुगर (मधुमेह) से पीड़ित मरीजों के लिए अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों के मार्गदर्शन में आयुर्वेदिक परामर्श एवं स्वास्थ्य प्रबंधन की सेवाएँ उपलब्ध हैं। प्रत्येक रोगी की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद उपयुक्त आयुर्वेदिक उपचार योजना तैयार की जाती है।
संस्थान में उपलब्ध सेवाओं में शामिल हैं:

  • आयुर्वेदिक औषधी शुगर किट
  • रक्तशोधन (Blood Purification) संबंधी आयुर्वेदिक चिकित्सा
  • गुडमार (मधुनाशिनी) युक्त आयुर्वेदिक औषधियाँ (आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय सलाह के अनुसार)
    व्यक्तिगत आयुर्वेदिक परामर्श
  • आहार एवं जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन
  • योग एवं प्राणायाम की सलाह

आयुर्वेद में गुडमार (Gymnema sylvestre) को पारंपरिक रूप से मधुमेह प्रबंधन में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों में से एक माना जाता है। इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

निष्कर्ष

यदि आप पहले से शुगर की दवा या इंसुलिन ले रहे हैं, तो बिना अपने चिकित्सक की सलाह के दवा बंद या कम न करें। आयुर्वेदिक उपचार भी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही लें। क्योंकि शुगर एक ऐसी बीमारी है जिसे सही जीवनशैली, नियमित जांच और उचित उपचार के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

CKD क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार

आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है CKD (Chronic Kidney Disease)। यह बीमारी धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देती है। यदि समय पर इसका पता न चले, तो यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। इसलिए CKD के बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

CKD क्या होता है?
CKD का पूरा नाम Chronic Kidney Disease है। इसमें किडनी लंबे समय तक धीरे-धीरे खराब होने लगती है और शरीर से विषैले पदार्थों को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती।

किडनी का मुख्य कार्य:-

  • खून को साफ करना
  • शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालना
  • पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना
  • ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना
  • जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तब शरीर में कई गंभीर समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

CKD के मुख्य लक्षण :-

CKD के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

सामान्य लक्षण :-

  • बार-बार पेशाब आना
  • पेशाब में झाग आना
  • शरीर में सूजन
  • पैरों और चेहरे पर सूजन
  • कमर दर्द
  • थकान और कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • उल्टी या मतली
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • सांस लेने में तकलीफ

CKD होने के मुख्य कारण :-

  1. डायबिटीज
    मधुमेह CKD का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर
    लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
  3. गलत खान-पान
    ज्यादा नमक, जंक फूड और कम पानी पीना किडनी पर असर डालता है।
  4. दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन
    Painkiller का लगातार उपयोग किडनी को कमजोर कर सकता है।
  5. धूम्रपान और शराब
    इनका अत्यधिक सेवन किडनी रोग का खतरा बढ़ा सकता है।

CKD की जांच कैसे होती है?

CKD की पहचान के लिए डॉक्टर कई प्रकार की जांच करते हैं :-

  • Creatinine Test
  • Blood Test
  • Urine Test
  • GFR Test
  • Ultrasound
  • CT Scan

आयुर्वेद में CKD का उपचार :-
आयुर्वेद शरीर को प्राकृतिक तरीके से संतुलित और मजबूत बनाने पर जोर देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली से शरीर को बेहतर समर्थन मिल सकता है।

आयुर्वेदिक उपचार में शामिल हो सकते हैं :-

  • जड़ी-बूटी आधारित औषधियां
  • पंचकर्म चिकित्सा
  • विशेष डाइट प्लान
  • योग और प्राणायाम
  • शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने वाली चिकित्सा

कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां :-

  • पुनर्नवा
  • गोखरू
  • गिलोय
  • वरुण छाल
  • पलाश पुष्प
  • सरपुंखा
  • अर्जुन छाल
  • निर्गुण्डी
  • हरड़
  • भूमि आंवला
  • पाषाण भेद
  • अपामार्ग पंचांग

किडनी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं।

किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।

CKD से बचाव के उपाय :-

  • रोज पर्याप्त पानी पिएं
  • ब्लड शुगर और BP नियंत्रित रखें
  • जंक फूड कम खाएं
  • नियमित व्यायाम करें
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें
  • बिना डॉक्टर सलाह दवाइयों का सेवन न करें

निष्कर्ष

CKD एक गंभीर लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। सही समय पर जांच और उचित उपचार से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। आयुर्वेद और संतुलित जीवनशैली शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।

किडनी खराब होने के पांच बहुत बड़े कारण क्या है?

कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया। अगर आपका स्वास्थ्य ठीक है तो आप सबसे सुखी है। लेकिन हमारे स्वास्थ्य के ठीक रहने के लिए हमारे शरीर के अंगों का ठीक रहना जरूरी है। अगर हमारा एक भी अंग सही ढंग से कार्य न करे तो उसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण अंग है किडनी, जो कि रक्तशोधन का काम करता है।

किडनी खून को छानती है और खून में से 5 6 चीजें निकालती है। इसमें एक तो है सॉडियम जिसे हम नमक बोलते हैं। फिर फास्फोरस, पोटाश, यूरिक एसिड आदि निकालती है। इसके अलावा खून के अंदर अतिरिक्त पानी को भी किडनी बाहर निकालने का काम करती है। मतलब आपका खून का कितना गाढ़ा रहना चाहिए, यह काम भी किडनी ही तय करती है। इसके अलावा बीपी का कम ज्यादा होना भी किडनी पर निर्भर करता है। सॉडियम को बैलेंस करने का काम भी किडनी करती है।

किडनी रोगी को जो खुजली होती है वह भी किडनी के प्रभाव के कारण होती है। किडनी बॉडी के 14 प्रकार के कार्य करती है या फिर उन्हें प्रभावित करती है। जिस प्रकार आरओ पानी की सफाई कर सभी चीजों को अलग अलग कर देता है उसी प्रकार किडनी भी सभी चीजों को अलग अलग कर देती है।

किडनी क्यों खराब होती है?

किडनी खराब होने का कारण खानपान का ध्यान नहीं रखना है। निम्नलिखित कारणों से भी किडनी में समस्या देखी जाती है।

— अगर आपका बीपी लंबे समय से अनियंत्रित है।
— अगर लंबे समय से डायबिटीज के शिकार है।
— अगर आप ज्यादा सफेद नमक खाते हैं।
— अगर आप सफेद शक्कर खाते हैं।
— अकेला सफेद आटा या मैदा खाते हो।
— समुद्री नमक का उपयोग।
— रिफाइंड तेल के उपयोग से।

किडनी रोग से बचाव के आयुर्वेदिक उपचार क्या है?

अगर आप जहर रूपी इन 5 चीजों का सेवन बंद कर दे तो किडनी रोग से बचा जा सकता है।

— नमक का उपयोग कम कर दे, एक 50 किलो वजन के व्य​क्ति के लिए दिन में आधा चम्मच नमक बहुत है। नमक का अधिक उपयोग किडनी रोग का कारण बनता है।
— हमेशा सफेद या समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करे।
— शक्कर की जगह गुड का इस्तेमाल करे।
— अकेले सफेद आटा खाने की जगह उसमें जौ, सोयाबिन आदि का कोई आटा मिक्स करके खाए।
— रिफाइंड तेल की जगह घाणी वाले तेल का उपयोग करे।

अगर आप मेरे द्वारा बताए गए इन कारणों और बचाव के उपायों का अनुसरण करते हैं तो सदैव किडनी रोग से दूर रहेंगे। साथ ही जो किडनी रोग से ग्रसित है उनके लिए भी यह खानपान और परहेज काफी फायदेमंद है।

पाठक अधिक जानकारी के लिए श्री नवग्रह आश्रम, मोती बोर का खेड़ा, रायला, जिला भीलवाड़ा सम्पर्क कर सकते हैं। श्री नवग्रह आश्रम आयुर्वेदिक पद्धति से कैंसर उपचार की अग्रणी संस्था है। श्री नवग्रह आश्रम अब तक विभिन्न बीमारियों के 55 हज़ार से अधिक रोगियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति ठीक कर चुका है।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें +91 84484 49569

ब्रेस्ट कैंसर होने का कारण, लक्षण और उपचार क्या है?

कैंसर एक ऐसा रोग है जिसका नाम सुनते ही हम डर जाते हैं क्योंकि इसे एक गंभीर बीमारी माना जाता है। साथ ही यह भी आम धारणा है कि कैंसर का कोई उपचार नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है, कई संस्थाएं आयुर्वेदिक तरीके से कैंसर का उपचार भी कर रही है और लोग उनकी औषधियों से ठीक भी हो रहे हैं। ऐसा ही एक संस्थान है नवग्रह आश्रम। भीलवाड़ा जिले के रायला गांव के पास मोती बोर का खेड़ा में स्थित नवग्रह आश्रम कैंसर सहित कई रोगों के उपचार के लिए विश्व विख्यात है।

वैसे तो कैंसर कई प्रकार का होता है। लेकिन आज हम बात करने वाले हैं ब्रेस्ट कैंसर होने के कारणों और लक्षणों पर। हमारा संस्थान पिछले कई बरसों से कैंसर सहित कई रोगों के निदान पर कार्य कर रहा है। हमारे बताए लक्षणों को पहचान कर आप जल्द इस बीमारी का उपचार लेकर ठीक हो सकते हैं।

क्या होता है ब्रेस्ट कैंसर?

माताओं, बहनों या कहे कि स्त्रियों के स्तन में होने वाला कैंसर ब्रेस्ट कैसर या स्तन कैंसर कहलाता है। इसमें ब्रेस्ट में एक गांठ बन जाती है जो कि कैंसर का कारण बनती है।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण क्या है?

– अगर दोनों ब्रेस्ट की साइज समान है तो आप खतरे से बाहर है।

– दोनों ब्रेस्ट निप्पल का कलर समान है और निप्पल हार्ड नहीं है तो भी कोई खतरा नहीं है।

– निप्पल बीच में ही सीधी अवस्था में रहे यानी कि वे झूके हुए, साइड में गए या ​फिर ऊपर की ओर उठे हुए नहीं होने चाहिए।

– ब्रेस्ट निप्पल अंदर की ओर धंसे हुए नहीं होने चाहिए। अगर निप्पल अंदर धंसने लगे तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना हो सकती है।

– अगर आपके पूरे ब्रेस्ट में कहीं पर कोई गांठ बनती है और जिसको छूने से आपको दर्द होता है तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना हो सकती है।

– अगर आपके ब्रेस्ट में असामान्य उभार दिखाई दे यानी किसी स्थान विशेष पर उभार आ जाए तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना हो सकती है।

– अगर आपके ब्रेस्ट कैंसर की स्कीन शरीर के अन्य हिस्सों के मुकाबले असामान्य रूप से कलर में बदलाव दिखे और झुर्रियां होती दिखाई दें तो ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। सरफेस स्कीन खुरदरी होने लगे तो भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।

– निप्पल से पानी, खून की बूंद या पस निकले। साथ ही ब्रेस्ट में जलन होने लगे तो भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत है।

 

ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण

– सही उम्र में शादी न होना।

– बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग यानी स्तनपान न करवाना।

– सिंथेटिक कपड़ों का उपयोग करना।

– पौ​ष्टिक भोजन न करना आदि।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय

– सूती, सौम्य कपड़े पहने।
– ब्रेस्ट की मसाज करे।
– सूर्य की धूप स्तन पर डाले।
– सात्विक भोजन करे।
– ब्रेस्ट का निरीक्षण करे आदि।

इस आ​र्टिकल में आपने जाना कि किस प्रकार ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों और कारणों को सही समय पर पहचान कर हम इस बीमारी से बच सकते हैं। कैंसर का इलाज संभव है। अधिक जानकारी के लिए आप नवग्रह आश्रम सम्पर्क कर सकते हैं।

Pavtan Pavtan
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