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CKD क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार

आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है CKD (Chronic Kidney Disease)। यह बीमारी धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देती है। यदि समय पर इसका पता न चले, तो यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। इसलिए CKD के बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

CKD क्या होता है?
CKD का पूरा नाम Chronic Kidney Disease है। इसमें किडनी लंबे समय तक धीरे-धीरे खराब होने लगती है और शरीर से विषैले पदार्थों को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती।

किडनी का मुख्य कार्य:-

  • खून को साफ करना
  • शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालना
  • पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना
  • ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना
  • जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तब शरीर में कई गंभीर समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

CKD के मुख्य लक्षण :-

CKD के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

सामान्य लक्षण :-

  • बार-बार पेशाब आना
  • पेशाब में झाग आना
  • शरीर में सूजन
  • पैरों और चेहरे पर सूजन
  • कमर दर्द
  • थकान और कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • उल्टी या मतली
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • सांस लेने में तकलीफ

CKD होने के मुख्य कारण :-

  1. डायबिटीज
    मधुमेह CKD का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर
    लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
  3. गलत खान-पान
    ज्यादा नमक, जंक फूड और कम पानी पीना किडनी पर असर डालता है।
  4. दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन
    Painkiller का लगातार उपयोग किडनी को कमजोर कर सकता है।
  5. धूम्रपान और शराब
    इनका अत्यधिक सेवन किडनी रोग का खतरा बढ़ा सकता है।

CKD की जांच कैसे होती है?

CKD की पहचान के लिए डॉक्टर कई प्रकार की जांच करते हैं :-

  • Creatinine Test
  • Blood Test
  • Urine Test
  • GFR Test
  • Ultrasound
  • CT Scan

आयुर्वेद में CKD का उपचार :-
आयुर्वेद शरीर को प्राकृतिक तरीके से संतुलित और मजबूत बनाने पर जोर देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली से शरीर को बेहतर समर्थन मिल सकता है।

आयुर्वेदिक उपचार में शामिल हो सकते हैं :-

  • जड़ी-बूटी आधारित औषधियां
  • पंचकर्म चिकित्सा
  • विशेष डाइट प्लान
  • योग और प्राणायाम
  • शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने वाली चिकित्सा

कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां :-

  • पुनर्नवा
  • गोखरू
  • गिलोय
  • वरुण छाल
  • पलाश पुष्प
  • सरपुंखा
  • अर्जुन छाल
  • निर्गुण्डी
  • हरड़
  • भूमि आंवला
  • पाषाण भेद
  • अपामार्ग पंचांग

किडनी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं।

किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।

CKD से बचाव के उपाय :-

  • रोज पर्याप्त पानी पिएं
  • ब्लड शुगर और BP नियंत्रित रखें
  • जंक फूड कम खाएं
  • नियमित व्यायाम करें
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें
  • बिना डॉक्टर सलाह दवाइयों का सेवन न करें

निष्कर्ष

CKD एक गंभीर लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। सही समय पर जांच और उचित उपचार से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। आयुर्वेद और संतुलित जीवनशैली शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।

किडनी खराब होने के पांच बहुत बड़े कारण क्या है?

कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया। अगर आपका स्वास्थ्य ठीक है तो आप सबसे सुखी है। लेकिन हमारे स्वास्थ्य के ठीक रहने के लिए हमारे शरीर के अंगों का ठीक रहना जरूरी है। अगर हमारा एक भी अंग सही ढंग से कार्य न करे तो उसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण अंग है किडनी, जो कि रक्तशोधन का काम करता है।

किडनी खून को छानती है और खून में से 5 6 चीजें निकालती है। इसमें एक तो है सॉडियम जिसे हम नमक बोलते हैं। फिर फास्फोरस, पोटाश, यूरिक एसिड आदि निकालती है। इसके अलावा खून के अंदर अतिरिक्त पानी को भी किडनी बाहर निकालने का काम करती है। मतलब आपका खून का कितना गाढ़ा रहना चाहिए, यह काम भी किडनी ही तय करती है। इसके अलावा बीपी का कम ज्यादा होना भी किडनी पर निर्भर करता है। सॉडियम को बैलेंस करने का काम भी किडनी करती है।

किडनी रोगी को जो खुजली होती है वह भी किडनी के प्रभाव के कारण होती है। किडनी बॉडी के 14 प्रकार के कार्य करती है या फिर उन्हें प्रभावित करती है। जिस प्रकार आरओ पानी की सफाई कर सभी चीजों को अलग अलग कर देता है उसी प्रकार किडनी भी सभी चीजों को अलग अलग कर देती है।

किडनी क्यों खराब होती है?

किडनी खराब होने का कारण खानपान का ध्यान नहीं रखना है। निम्नलिखित कारणों से भी किडनी में समस्या देखी जाती है।

— अगर आपका बीपी लंबे समय से अनियंत्रित है।
— अगर लंबे समय से डायबिटीज के शिकार है।
— अगर आप ज्यादा सफेद नमक खाते हैं।
— अगर आप सफेद शक्कर खाते हैं।
— अकेला सफेद आटा या मैदा खाते हो।
— समुद्री नमक का उपयोग।
— रिफाइंड तेल के उपयोग से।

किडनी रोग से बचाव के आयुर्वेदिक उपचार क्या है?

अगर आप जहर रूपी इन 5 चीजों का सेवन बंद कर दे तो किडनी रोग से बचा जा सकता है।

— नमक का उपयोग कम कर दे, एक 50 किलो वजन के व्य​क्ति के लिए दिन में आधा चम्मच नमक बहुत है। नमक का अधिक उपयोग किडनी रोग का कारण बनता है।
— हमेशा सफेद या समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करे।
— शक्कर की जगह गुड का इस्तेमाल करे।
— अकेले सफेद आटा खाने की जगह उसमें जौ, सोयाबिन आदि का कोई आटा मिक्स करके खाए।
— रिफाइंड तेल की जगह घाणी वाले तेल का उपयोग करे।

अगर आप मेरे द्वारा बताए गए इन कारणों और बचाव के उपायों का अनुसरण करते हैं तो सदैव किडनी रोग से दूर रहेंगे। साथ ही जो किडनी रोग से ग्रसित है उनके लिए भी यह खानपान और परहेज काफी फायदेमंद है।

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Pavtan Pavtan
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