क्या आपका दिल बिना वजह तेज़ी से धड़कने लगता है? जानें इसके आयुर्वेदिक समाधान
हम सभी जानते हैं कि दिल हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो रक्त को पंप करके शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुँचाने का काम करता है। दिल की तेज धड़कन कई कारणों से हो सकती है। इसके पीछे शारीरिक गतिविधि, चिंता, तनाव या अन्य कारण हो सकते हैं। हमारा दिल बिना रुके चौबीस घंटे धड़कता है।
आमतौर पर प्रति मिनट में 60 से 100 बार दिल का धड़कना सामान्य माना गया है, लेकिन यह बात तब लागू होती है जब इसकी गणना सामान्य परिस्थितियों में हो। मान लीजिए आप दौड़ लगा रहे हैं तो आपकी धड़कन बढ़ जाएगी जो 100 प्लस रेट प्रति मिनट भी हो सकती है। लेकिन अगर आप कोई काम नहीं कर रहे हैं, और घर में बैठे है इसके बावजूद धड़कन 100 प्लस रेट प्रति मिनट से अधिक है तो यह गंभीर हो सकता है ऐसे में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
इस आर्टिकल में हम दिल के बिना वजह तेजी से धड़कने के कारणों और इस समस्या के आयुर्वेदिक समाधान के बारे में विस्तार से जानेंगे।
दिल तेज धड़कने का कारण क्या है?
दिल की धड़कन के तेज होने के कारणों को उनकी परिस्थियों के आधार पर हम दो भागों में बांट सकते हैं क्योंकि दिल का तेजी से धड़कना शारीरिक क्रियाकलापों और बीमारी से जुड़ा होने के कारणों पर निर्भर करता है।
सामान्य कारण
इनमें हम दिल तेज धड़कने के सामान्य कारणों के बारे में जानेंगे, जो गंभीर नहीं माने जाते।
- अधिक व्यायाम, तेज दौड़ने और थकावट के कारण भी दिल की धड़कन तेज हो जाती है।
- अधिक चिंता, उत्साह, घबराहट और डर के कारण भी दिल की धड़कन बढ़ जाती है।
- शरीर में पानी की कमी के कारण जी घबराने के दौरान भी धड़कन तेज हो जाती है।
- ऊंचाई पर चढ़ने के दौरान ऑक्सीजन की कमी से यह समस्या देखने को मिलती है।
असामान्य कारण
इनमें हम उन कारणों को सम्मिलित करते हैं जो बीमारी से जुड़े और गंभीर हो सकते हैं।
- दिल से जुड़ी बीमारी।
- धड़कन का अनियमित होना।
- कॉलेस्ट्रोल का बढ़ना।
- हाई बीपी एवं शुगर।
- बुखार एवं फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं।
- कैफीन का सेवन।
- शराब एवं धुम्रपान का सेवन।
- नींद की कमी।
- दवाइयों का दुष्प्रभाव।
- स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं आदि।
दिल की धड़कन तेज होने पर क्या मुझे डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए?
देखिए, इस मामले में सबसे पहले यह देखना होगा कि आपकी समस्या किस प्रकार की है। अगर दिल की तेज धड़कन सामान्य कारणों से बढ़ रही है तो संभव है कि यह समस्या गंभीर नहीं हो लेकिन अगर दिल की धड़कन के तेज होने के पीछे का कारण दिल से जुड़ी कोई बीमारी, हाई बीपी, हाई कॉलेस्ट्रोल या असामान्य कारण हैं तो समस्या गंभीर हो सकती है।
इस मामले में हमें यह भी देखना होगा कि सामान्य कारणों में भी अगर दिल की धड़कन एक बार तेज होकर पुन: नॉर्मल हो रही है तो ठीक है, लेकिन अगर सामान्य कारणों में भी धड़कन तेज होने लगे और कुछ समय बाद सामान्य नहीं हो तो हमें डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
इसी प्रकार असामान्य कारणों में भी दिल की धड़कन के तेज होने की समस्या बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टर समस्या के कारणों और स्थिति के आधार पर उपचार शुरू करेगा।
दिल की धड़कन को नियंत्रित करने का आयुर्वेदिक समाधान क्या है?
आयुर्वेद में ऐसे कई उपायों और जड़ी बुटियों के बारे में बताया गया है जो गंभीर रोगों के उपचार में भी सहायक सिद्ध हो रही है। हम आयुर्वेद से जुड़े कुछ ऐसे ही उपायों के बारे में चर्चा करेंगे, जो बिना वजह दिल की धड़कन के तेज होने की समस्या के उपचार में सहायक है। इन उपायों को अपनाकर हम दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
- अर्जुन – अर्जुन की छाल का सेवन हृदय और परिसंचरण तंत्र के लिए बहुत अच्छा माना गया है। यह हृदय संबंधी समस्याओं को दूर करने में मददगार है। इसकी छाल का पाउडर बनाकर या इसकी छाल को गलाकर पानी या दूध के साथ सेवन करने से हृदय रोग से जुड़ी समस्या दूर होती है और हृदय की गति भी नियंत्रित रहती है।
- ब्राम्ही और जटामांसी – ब्राह्मी और जटामांसी जैसी औषधि दिमाग को शांत रखने वाली औषधि मानी है। दिमाग शांत रहने से हृदय के कार्य में बाधा नही आती है। ये दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करने में लाभकारी है।
- पुनर्नवा – पूर्णानवा भी हृदय रोगों को दूर करने में सहायक है। यह कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखता है।
- कुटकी – कुटकी लिवर को ठीक करने का काम करता है। लेकिन अगर लिवर स्वस्थ होगा तो इसके द्वारा सभी एंजाइम और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहने से हृदय रोग का खतरा भी कम हो जाएगा।
- हल्दी – दिल की सेहत के लिए नियमित रूप से हल्दी का सेवन अच्छा माना गया है। हल्दी हमारे शरीर में खून का थक्का नहीं बनने देती और खून को पतला करने का काम करती है।
- गाय का दूध – गाय का दूध पीना भी हृदय रोग से बचाए रखता है। आयुर्वेद में गाय के दूध को हल्का, सुपाच्य, हृदय को बल देने वाला माना गया है।
- अलसी – अलसी का उपयोग दिल की बीमारियों से बचाने में सहायक है। अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो रक्त नलिकाओं में वसा के जमाव को रोकने में मदद करता है।
- संतुलित जीवन शैली – इन आयुर्वेदिक उपायों के अलावा संतुलित जीवन शैली, पौष्टिक भोजन का सेवन आदि से भी हृदय को मजबूत बनाया जा सकता है।
बिना वजह हृदय की गति का बढ़ना गंभीर हो सकता है। आप अच्छे से इसके कारणों की पहचान करें और लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें। साथ ही, किसी भी प्रकार का आयुर्वेदिक उपाय आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में ही शुरू करें।

