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	<title>Shree Navgrah Ashram</title>
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	<description>Ayurvedic Treatment for Cancer</description>
	<lastBuildDate>Sun, 19 Jul 2026 06:59:30 +0000</lastBuildDate>
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		<title>ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) क्या होता हैं? जानें इसके लक्षण,कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/osteosarcoma-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Navgrahaashram]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 06:54:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Cancer News]]></category>
		<category><![CDATA[Ayurveda and Cancer]]></category>
		<category><![CDATA[Ayurvedic Support for Cancer]]></category>
		<category><![CDATA[Bone Cancer]]></category>
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		<category><![CDATA[Osteosarcoma in Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Osteosarcoma Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[Shree Navgrah Aashram Sewa Sansthan]]></category>
		<category><![CDATA[ऑस्टियो सार्कोमा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[हड्डी का कैंसर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों का एक गंभीर कैंसर है। जानें इसके कारण, शुरुआती लक्षण, जांच, आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण। ऑस्टियो सार्कोमा क्या है? ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) हड्डियों का एक प्रकार का कैंसर है, जो सामान्यतः नई हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं (Osteoblasts) से विकसित होता है। यह अधिकतर किशोरों और युवाओं में देखा जाता है, लेकिन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों का एक गंभीर कैंसर है। जानें इसके कारण, शुरुआती लक्षण, जांच, आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऑस्टियो सार्कोमा क्या है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) हड्डियों का एक प्रकार का कैंसर है, जो सामान्यतः नई हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं (Osteoblasts) से विकसित होता है। यह अधिकतर किशोरों और युवाओं में देखा जाता है, लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है। यह प्रायः घुटने, जांघ की हड्डी, टांग या बाजू की लंबी हड्डियों में पाया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऑस्टियो सार्कोमा के लक्षण</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हड्डी में लगातार दर्द</li>



<li>प्रभावित स्थान पर सूजन</li>



<li>गांठ या उभार महसूस होना</li>



<li>चलने-फिरने में कठिनाई</li>



<li>मामूली चोट में भी हड्डी टूट जाना</li>



<li>रात के समय दर्द बढ़ना</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऑस्टियो सार्कोमा के कारण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑस्टियो सार्कोमा का सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता, लेकिन कुछ जोखिम कारक हो सकते हैं:-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आनुवंशिक कारण</li>



<li>तेजी से हड्डियों का विकास</li>



<li>पहले रेडियोथेरेपी लेना</li>



<li>कुछ दुर्लभ आनुवंशिक रोग</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">जांचें</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>एक्स-रे</li>



<li>MRI</li>



<li>CT Scan</li>



<li>PET Scan</li>



<li>बायोप्सी (Biopsy)</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आयुर्वेदिक दृष्टिकोण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद में रोगी की प्रकृति, दोष, धातु, अग्नि और ओज का मूल्यांकन कर समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाता है। संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और चिकित्सक के मार्गदर्शन में आयुर्वेदिक उपचार रोगी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकते हैं। आयुर्वेद को कैंसर के मानक (स्टैंडर्ड) उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि योग्य चिकित्सक की सलाह से पूरक (Complementary) रूप में अपनाना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जीवनशैली संबंधी सुझाव</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करें।</li>



<li>धूम्रपान और शराब से बचें।</li>



<li>चिकित्सक की सलाह अनुसार हल्का व्यायाम करें।</li>



<li>पर्याप्त नींद लें।</li>



<li>सभी जांच और फॉलो-अप समय पर कराएं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान में आयुर्वेदिक दृष्टिकोण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान, भीलवाड़ा (राजस्थान) में ऑस्टियो सार्कोमा सहित गंभीर रोगों के लिए आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार प्रत्येक रोगी का व्यक्तिगत मूल्यांकन किया जाता है। रोगी की प्रकृति, दोष, धातु, अग्नि, रोग की अवस्था तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उपचार योजना बनाई जाती है।<br>आयुर्वेदिक परामर्श के दौरान रोगी को निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाता है:<br> व्यक्तिगत आयुर्वेदिक परामर्श<br> रोगी की स्थिति के अनुसार आहार (पथ्य-अपथ्य) संबंधी सलाह<br> जीवनशैली और दिनचर्या में आवश्यक सुधार<br> रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य के समर्थन पर ध्यान<br> नियमित फॉलो-अप और चिकित्सकीय निगरानी</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निष्कर्ष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph" id="osteosarcoma">ऑस्टियो सार्कोमा एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य कैंसर है, विशेषकर यदि इसका समय पर पता चल जाए। लगातार हड्डी में दर्द, सूजन या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शुगर क्या होता है? जानिए कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक उपचार</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/shugar-kya-hota-hai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Navgrahaashram]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:08:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment For Diabetes]]></category>
		<category><![CDATA[shree navgrah ashram]]></category>
		<category><![CDATA[मधुमेह (Diabetes)]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज के समय में शुगर (Diabetes) एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। यदि समय पर इसकी पहचान और उचित देखभाल न की जाए, तो यह हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं शुगर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आज के समय में शुगर (Diabetes) एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। यदि समय पर इसकी पहचान और उचित देखभाल न की जाए, तो यह हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं शुगर क्या है, इसके कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर (Diabetes) क्या होता है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">शुगर या डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर रक्त में मौजूद ग्लूकोज (Sugar) का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसका मुख्य कारण इंसुलिन हार्मोन की कमी या इंसुलिन का सही ढंग से कार्य न करना होता है।<br>इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा बनाया जाता है और रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर के मुख्य प्रकार</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>टाइप 1 डायबिटीज</strong> :- इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।</li>



<li><strong>टाइप 2 डायबिटीज</strong> :- यह सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता।</li>



<li><strong>गर्भावधि डायबिटीज (Gestational Diabetes)</strong> :- यह गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में विकसित हो सकती है।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर होने के प्रमुख कारण</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>अनियमित खान-पान</strong> :- अधिक मीठा, जंक फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन।</li>



<li><strong>शारीरिक गतिविधि की कमी</strong> :- व्यायाम न करना और लंबे समय तक बैठे रहना।</li>



<li><strong>मोटापा</strong> :- अधिक वजन टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है।</li>



<li><strong>आनुवंशिक कारण</strong> :- परिवार में डायबिटीज का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ सकता है।</li>



<li><strong>तनाव</strong> :- लगातार मानसिक तनाव रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकता है।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर के शुरुआती लक्षण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">यदि निम्न लक्षण दिखाई दें, तो जांच करवाना उचित हो सकता है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बार-बार प्यास लगना</li>



<li>बार-बार पेशाब आना</li>



<li>अत्यधिक भूख लगना</li>



<li>थकान और कमजोरी</li>



<li>वजन कम होना</li>



<li>धुंधला दिखाई देना</li>



<li>घाव का देर से भरना</li>



<li>त्वचा में खुजली या संक्रमण</li>



<li>हाथ-पैरों में झुनझुनी</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर की जांच कैसे होती है</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">डॉक्टर निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>Fasting Blood Sugar (FBS)</li>



<li>Post Prandial Blood Sugar (PPBS)</li>



<li>HbA1c Test</li>



<li>Random Blood Sugar Test</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आयुर्वेदिक दृष्टिकोण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद में मधुमेह को &#8220;प्रमेह&#8221; के अंतर्गत वर्णित किया गया है। आयुर्वेद संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या, योग और जीवनशैली सुधार पर विशेष बल देता है।<br>आयुर्वेदिक देखभाल में शामिल हो सकते हैं:</p>



<p class="wp-block-paragraph">√ संतुलित एवं नियंत्रित आहार<br>√ नियमित योग एवं प्राणायाम<br>√ वजन नियंत्रण<br>√ विशेषज्ञ की सलाह अनुसार आयुर्वेदिक औषधियां<br>√ तनाव प्रबंधन<br>√ किसी भी उपचार या औषधि का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शुगर रोगियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवाएं।</li>



<li>मीठे और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।</li>



<li>रोजाना व्यायाम करें।</li>



<li>पर्याप्त नींद लें।</li>



<li>तनाव को नियंत्रित रखें।</li>



<li>डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाइयों का सेवन करें।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान में शुगर रोगियों के लिए आयुर्वेदिक परामर्श</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">श्री नवग्रह आश्रम सेवा संस्थान में शुगर (मधुमेह) से पीड़ित मरीजों के लिए अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों के मार्गदर्शन में आयुर्वेदिक परामर्श एवं स्वास्थ्य प्रबंधन की सेवाएँ उपलब्ध हैं। प्रत्येक रोगी की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद उपयुक्त आयुर्वेदिक उपचार योजना तैयार की जाती है।<br>संस्थान में उपलब्ध सेवाओं में शामिल हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आयुर्वेदिक औषधी शुगर किट</li>



<li>रक्तशोधन (Blood Purification) संबंधी आयुर्वेदिक चिकित्सा</li>



<li>गुडमार (मधुनाशिनी) युक्त आयुर्वेदिक औषधियाँ (आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय सलाह के अनुसार)<br>व्यक्तिगत आयुर्वेदिक परामर्श</li>



<li>आहार एवं जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन</li>



<li>योग एवं प्राणायाम की सलाह</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद में गुडमार (Gymnema sylvestre) को पारंपरिक रूप से मधुमेह प्रबंधन में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों में से एक माना जाता है। इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निष्कर्ष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"> यदि आप पहले से शुगर की दवा या इंसुलिन ले रहे हैं, तो बिना अपने चिकित्सक की सलाह के दवा बंद या कम न करें। आयुर्वेदिक उपचार भी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही लें। क्योंकि शुगर एक ऐसी बीमारी है जिसे सही जीवनशैली, नियमित जांच और उचित उपचार के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>CKD क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/ckd-ke-lakshan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Navgrahaashram]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 06:59:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[Shree Navgrah Ashram]]></category>
		<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment Centres]]></category>
		<category><![CDATA[Chronic Kidney]]></category>
		<category><![CDATA[CKD]]></category>
		<category><![CDATA[CKD Symptoms]]></category>
		<category><![CDATA[kidney ayurvedic treatment]]></category>
		<category><![CDATA[shree navgrah ashram]]></category>
		<category><![CDATA[किडनी खराब होने के लक्षण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है CKD (Chronic Kidney Disease)। यह बीमारी धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देती है। यदि समय पर इसका पता न चले, तो यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। इसलिए CKD के बारे में सही जानकारी होना [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आजकल किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है <strong>CKD (Chronic Kidney Disease)</strong>। यह बीमारी धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देती है। यदि समय पर इसका पता न चले, तो यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। इसलिए CKD के बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>CKD क्या होता है?</strong><br>CKD का पूरा नाम Chronic Kidney Disease है। इसमें किडनी लंबे समय तक धीरे-धीरे खराब होने लगती है और शरीर से विषैले पदार्थों को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किडनी का मुख्य कार्य:-</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>खून को साफ करना</li>



<li>शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालना</li>



<li>पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना</li>



<li>ब्लड प्रेशर नियंत्रित करना</li>



<li>जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तब शरीर में कई गंभीर समस्याएं शुरू हो सकती हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>CKD के मुख्य लक्षण :- </strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">CKD के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सामान्य लक्षण :-</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बार-बार पेशाब आना</li>



<li>पेशाब में झाग आना</li>



<li>शरीर में सूजन</li>



<li>पैरों और चेहरे पर सूजन</li>



<li>कमर दर्द</li>



<li>थकान और कमजोरी</li>



<li>भूख कम लगना</li>



<li>उल्टी या मतली</li>



<li>हाई ब्लड प्रेशर</li>



<li>सांस लेने में तकलीफ</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>CKD होने के मुख्य कारण :-</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>डायबिटीज</strong><br>मधुमेह CKD का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।</li>



<li><strong>हाई ब्लड प्रेशर</strong><br>लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।</li>



<li><strong>गलत खान-पान</strong><br>ज्यादा नमक, जंक फूड और कम पानी पीना किडनी पर असर डालता है।</li>



<li><strong>दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन</strong><br>Painkiller का लगातार उपयोग किडनी को कमजोर कर सकता है।</li>



<li><strong>धूम्रपान और शराब</strong><br>इनका अत्यधिक सेवन किडनी रोग का खतरा बढ़ा सकता है।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>CKD की जांच कैसे होती है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">CKD की पहचान के लिए डॉक्टर कई प्रकार की जांच करते हैं :-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>Creatinine Test</strong></li>



<li><strong>Blood Test</strong></li>



<li><strong>Urine Test</strong></li>



<li><strong>GFR Test</strong></li>



<li><strong>Ultrasound</strong></li>



<li><strong>CT Scan</strong></li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आयुर्वेद में CKD का उपचार</strong> :-<br>आयुर्वेद शरीर को प्राकृतिक तरीके से संतुलित और मजबूत बनाने पर जोर देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली से शरीर को बेहतर समर्थन मिल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेदिक उपचार में शामिल हो सकते हैं :-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>जड़ी-बूटी आधारित औषधियां</li>



<li>पंचकर्म चिकित्सा</li>



<li>विशेष डाइट प्लान</li>



<li>योग और प्राणायाम</li>



<li>शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने वाली चिकित्सा</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां :-</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>पुनर्नवा</strong></li>



<li><strong>गोखरू</strong></li>



<li><strong>गिलोय</strong></li>



<li><strong>वरुण छाल</strong></li>



<li><strong>पलाश पुष्प</strong></li>



<li><strong>सरपुंखा</strong></li>



<li><strong>अर्जुन छाल</strong></li>



<li><strong>निर्गुण्डी</strong></li>



<li><strong>हरड़</strong></li>



<li><strong>भूमि आंवला</strong></li>



<li><strong>पाषाण भेद</strong></li>



<li><strong>अपामार्ग पंचांग</strong></li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किडनी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>CKD से बचाव के उपाय :-</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>रोज पर्याप्त पानी पिएं</li>



<li>ब्लड शुगर और BP नियंत्रित रखें</li>



<li>जंक फूड कम खाएं</li>



<li>नियमित व्यायाम करें</li>



<li>धूम्रपान और शराब से दूर रहें</li>



<li>बिना डॉक्टर सलाह दवाइयों का सेवन न करें</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निष्कर्ष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">CKD एक गंभीर लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। सही समय पर जांच और उचित उपचार से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। आयुर्वेद और संतुलित जीवनशैली शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://shreenavgrahaashram.org/ckd-ke-lakshan/">CKD क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार</a> appeared first on <a href="https://shreenavgrahaashram.org">Shree Navgrah Ashram</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>ब्रेन ट्यूमर क्या होता है? जानें इसके लक्षण, कारण एवं आयुर्वेदिक उपचार</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/brain-tumor-symptoms-in-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Navgrahaashram]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 05:38:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेन ट्यूमर का आयुर्वेदिक उपचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आजकल बदलती जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण और अनियमित खान-पान के कारण कई गंभीर बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक है ब्रेन ट्यूमर। यह बीमारी सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है, लेकिन सही समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आजकल बदलती जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण और अनियमित खान-पान के कारण कई गंभीर बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक है ब्रेन ट्यूमर। यह बीमारी सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है, लेकिन सही समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं ब्रेन ट्यूमर क्या होता है, इसके लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में विस्तार से।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर क्या होता है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में बनने वाली असामान्य कोशिकाओं (Cells) की गांठ होती है। जब दिमाग की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब ट्यूमर बनता है। यह ट्यूमर सौम्य (Benign) या घातक (Malignant) हो सकता है।<br>ब्रेन ट्यूमर का असर व्यक्ति की सोचने, समझने, बोलने, देखने और शरीर के संतुलन पर पड़ सकता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर के मुख्य लक्षण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेन ट्यूमर के लक्षण व्यक्ति की उम्र, ट्यूमर के आकार और उसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं। सामान्यतः ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:<br>• लगातार सिर दर्द रहना<br>• सुबह के समय तेज सिर दर्द होना<br>• उल्टी या मतली आना<br>• आंखों की रोशनी कमजोर होना<br>• याददाश्त कमजोर होना<br>• शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन<br>• बोलने में कठिनाई होना<br>• चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना<br>• बार-बार दौरे (Seizures) आना<br>• व्यवहार में बदलाव होना<br><strong>यदि इनमें से कोई लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर होने के कारण</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ मुख्य कारण माने जाते हैं:</p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>अत्यधिक रेडिएशन:</strong> मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रेडिएशन के अत्यधिक संपर्क से जोखिम बढ़ सकता है।</li>



<li><strong>आनुवंशिक कारण:</strong> परिवार में किसी को ब्रेन ट्यूमर होने पर इसकी संभावना बढ़ सकती है।</li>



<li><strong>कमजोर इम्यून सिस्टम: </strong>कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में यह बीमारी अधिक देखी जाती है।</li>



<li><strong>तनाव और खराब जीवनशैली: </strong>अनियमित दिनचर्या, तनाव और जंक फूड का अत्यधिक सेवन शरीर को कमजोर बना सकता है।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर की जांच कैसे होती है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई प्रकार की जांच करते हैं:<br><strong>• MRI Scan<br>• CT Scan<br>• Neurological Examination<br>• Biopsy</strong><br>इन जांचों से ट्यूमर की स्थिति और प्रकार का पता लगाया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर का आयुर्वेदिक उपचार</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद में शरीर को प्राकृतिक तरीके से संतुलित करने पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेदिक उपचार का उद्देश्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना और शरीर को अंदर से मजबूत बनाना होता है।<br>आयुर्वेदिक उपचार में शामिल हो सकते हैं:<br>• जड़ी-बूटियों आधारित औषधियां<br>• पंचकर्म चिकित्सा<br>• विशेष आयुर्वेदिक आहार<br>• योग और प्राणायाम<br>• तनाव कम करने वाली चिकित्सा<br>• कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां जैसे <strong>अश्वगंधा, ब्राह्मी, गिलोय </strong>आदि शरीर को ऊर्जा देने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक मानी जाती हैं।<br><strong>ध्यान दें: किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रेन ट्यूमर से बचाव के उपाय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">संतुलित और पौष्टिक भोजन लें<br>पर्याप्त नींद लें<br>मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग कम करें<br>तनाव से दूर रहें<br>नियमित योग और व्यायाम करें<br>शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निष्कर्ष</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से मरीज स्वस्थ जीवन जी सकता है। आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद भी शरीर को मजबूत बनाने और स्वास्थ्य सुधारने में मदद कर सकता है। जागरूकता और नियमित जांच ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।</p>
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		<title>क्या बलगम में खून आना खतरनाक है? जानिए इसके कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/balgam-me-khoon-aane-ka-ayurvedic-upchar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Nov 2024 10:01:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[बलगम में खून आना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बलगम में खून आना ऐसी समस्या है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। बलगम में खून आने को हेमोप्टाइसिस कहते हैं। अगर बलगम खांसी में बहुत ज़्यादा खून आ रहा है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर में किसी अंदरूनी समस्या या बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बलगम में खून आना ऐसी समस्या है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। बलगम में खून आने को हेमोप्टाइसिस कहते हैं। अगर बलगम खांसी में बहुत ज़्यादा खून आ रहा है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर में किसी अंदरूनी समस्या या बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई बार यह समस्या संक्रमण, चोट या अन्य कारणों से भी होती है, लेकिन बलगम में खून आने पर उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए, और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद में ऐसे प्राकृति उपचार के बारे में बताया गया हैं, जिन्हें अपनाने से इस समस्या से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है। इस आर्टिकल में हम बलगम में खून आने के कारण, इसके लक्षण और आयुर्वेदिक उपायों के बारे में जानेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बलगम में खून आने के कारण</h3>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>सांस की नली में संक्रमण</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">अगर सांस की नली में संक्रमण है, तो बलगम में खून आने की समस्या हो सकती है। ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या अन्य संक्रमण के कारण फेफड़ों और सांस की नली में सूजन पैदा होती, जिससे बलगम में खून आ सकता है।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li><strong>फेफड़ों की गंभीर बीमारियां</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">फेफड़ों से जुड़ी टीबी, फेफड़ों का कैंसर या पल्मोनरी एम्बोलिज्म आदि बीमारियों में भी बलगम में खून आने की समस्या हो सकती है। ये बीमारियां आमतौर पर लंबे समय तक खांसी और कमजोरी के लक्षणों के साथ आती हैं।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li><strong>नाक या गले की चोट</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">कभी-कभी नाक या गले की अंदरूनी चोटों के कारण भी बलगम में खून आ सकता है, लेकिन यह समस्या लम्बे समय तक नहीं रहती। चोट के ठीक होने के साथ समस्या भी खत्म हो जाती है।</p>



<ol start="4" class="wp-block-list">
<li><strong>अस्थमा या एलर्जी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">अस्थमा या एलर्जी की समस्या होने पर भी बलगम में खून आ सकता है। इसके अलावा फेफड़ों में खून के थक्के, धूम्रपान, और प्रदूषण के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है।</p>



<ol start="5" class="wp-block-list">
<li><strong>रक्त का पतला होना</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">खून को पतला करने की दवाइयों के सेवन से भी बलगम में खून आने की संभावना बढ़ जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या बलगम में खून आना खतरनाक है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बलगम में खून आना खतरनाक हो सकता है, लेकिन यह हमेशा गंभीर नहीं होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बलगम में खून कितनी मात्रा में, और यह कितनी बार आ रहा है। अगर बार-बार या लगातार खून आ रहा है, तो समस्या गंभीर हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर यह समस्या बार-बार होने के साथ ही खून की मात्रा भी बढ़ रही है, और उसके साथ अन्य लक्षण जैसे तेज बुखार, सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव हो रहा ​है, तो इस स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बलगम में खून आने के साथ अन्य लक्षण</h3>



<ol class="wp-block-list">
<li>बलगम में हल्के लाल से गहरे भूरे रंग का खून दिखना।</li>



<li>बार-बार खांसी के साथ खून आना।</li>



<li>खून की मात्रा का समय के साथ बढ़ना।</li>



<li>सांस लेने में कठिनाई महसूस होना।</li>



<li>सीने में दर्द, भारीपन या जलन होना।</li>



<li>तेज बुखार एवं ठंड लगना।</li>



<li>कमजोरी और थकान का अनुभव।</li>



<li>भूख कम लगना, वज़न कम होना आदि।</li>
</ol>



<h3 class="wp-block-heading">बलगम में खून आने की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार</h3>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>मुलैठी और शहद</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">मुलैठी एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है, जो फेफड़ों की सूजन को कम करने में मददगार है। मुलैठी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना लाभदायक माना गया है।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li><strong>तुलसी और अदरक का रस</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">तुलसी और अदरक का रस बलगम में संक्रमण को ठीक करने में सहायक है। इसे शहद के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li><strong>हल्दी और गर्म पानी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म पानी में हल्दी मिलाकर पीने से बलगम साफ होता है, और खून आना बंद हो सकता है।</p>



<ol start="4" class="wp-block-list">
<li><strong>त्रिफला चूर्ण</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">त्रिफला चूर्ण शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है, और फेफड़ों को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। इसे गुनगुने पानी के साथ रात में लेना फायदेमंद है।</p>



<ol start="5" class="wp-block-list">
<li><strong>आंवला रस</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">आंवला का रस रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। रोजाना आंवला रस का सेवन बलगम से संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहाय​क है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अन्य घरेलू उपाय</h3>



<ol class="wp-block-list">
<li>धूम्रपान और अत्यधिक प्रदूषण से बचें।</li>



<li>गर्म और ताजे भोजन का सेवन करें।</li>



<li>नियमित योग और प्राणायाम करें।</li>



<li>पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।</li>



<li>मसालेदार और तला हुआ नहीं खाएं।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">यह आर्टिकल इस समस्या से जुड़ी सामान्य जानकारी के​ लिए लिखा गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर, और आयुर्वेदिक उपचार लेने से पूर्व विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। डॉक्टर आपकी समस्या और स्थिति के आधार पर बेहतर उपचार सुझाएंगे।</p>
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		<item>
		<title>क्या आपका भी खून हो गया है गाढ़ा? जानिए खून पतला करने के आयुर्वेदिक उपाय</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/khoon-patla-karne-k-ayurvedic-upay/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Nov 2024 11:13:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[खून पतला करने के आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज के समय में स्वास्थ्य का ख्याल रखना बहुत आवश्यक हो गया है, क्योंकि गलत खानपान, रोजमर्रा की जिंदगी और मौसम में परिर्वतन के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसी ही एक समस्या है सर्दी के मौसम में खून का गाढ़ा हो जाना, जो हमारे लिए जोखिम पैदा कर सकता है क्योंकि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आज के समय में स्वास्थ्य का ख्याल रखना बहुत आवश्यक हो गया है, क्योंकि गलत खानपान, रोजमर्रा की जिंदगी और मौसम में परिर्वतन के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसी ही एक समस्या है सर्दी के मौसम में खून का गाढ़ा हो जाना, जो हमारे लिए जोखिम पैदा कर सकता है क्योंकि इसकी वजह से दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल, बहुत कम ही लोगों को इस बारे में पता होता है कि उनका खून गाढ़ा हो गया है, और इसका कारण क्या है? अगर हम खून के गाढ़ा होने के कारण को जान लें और कुछ उपायों को अपना लें तो हम इससे होने वाली बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं। इस आर्टिकल में हम खून गाढ़ा होने के कारण, लक्षण और इससे बचाव के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सर्दियों में खून गाढ़ा क्यों होता है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सर्दी के मौसम में जब ठंड बढ़ती है तो हमारा खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे रक्त के थक्के जम जाते हैं। रक्त का थक्का जमने से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जिसमें हृदय रोग प्रमुख है। यही एक कारण है कि सर्दी के मौसम में हमें अधिक दिल के दौरे और स्ट्रोक के मामले देखने को मिलते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सर्दी में रक्त का थक्का जमने से पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित रहता है, और दिल पर खून को पंप करने का प्रेशर बढ़ता है जिससे हाई बीपी की समस्या हो जाती है। इसके अलावा रक्त का थक्का जमने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोगधक क्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसे में ठंड में निमोनिया और फेफड़ों संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खून गाढ़ा होने के लक्षण क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आमतौर पर खून गाढ़ा होने पर कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं। यह तब पता चलता है जब शरीर के किसी स्थान पर रक्त का थक्का जाता है। इसके अलावा अगर निम्नलिखित में से कोई लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं।</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>आंखों का धुंधलापन</li>



<li>सिरदर्द</li>



<li>खुजली</li>



<li>सांस लेने में परेशानी</li>



<li>चक्कर आना</li>



<li>ब्लड प्रेशर का ज़्यादा होना</li>



<li>कमज़ोरी महसूस होना</li>
</ol>



<h3 class="wp-block-heading">खून पतला करने के घरेलू उपाय क्या है?</h3>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>हल्दी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">हल्दी का सेवन खून पतला करने के लिए बहुत ही असरदार उपाय है। हल्दी में सूजनरोधी और रक्त को पतला करने वाले या थक्कारोधी गुण होते हैं। सर्दी के मौसम में गुनगुने दूध के साथ हल्दी का सेवन फायदेमंद रहता है।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li><strong>अदरक</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">अदरक खून के थक्के जमने से रोकने में मदद कर सकता है। अदरक में सैलिसिलेट्स भी होते हैं जो एस्पिरिन की तरह खून को पतला करने का गुण रखते हैं।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li><strong>दालचीनी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">दालचीनी में खून को पतला करने वाला एजेंट कॉमारिन होता है। रक्त-पतला करने वाली दवा वारफारिन, कॉमारिन से ही प्राप्त होती है इसलिए दालचीनी का सेवन अवश्य करें।</p>



<ol start="4" class="wp-block-list">
<li><strong>खट्टे फल</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">खून प​तला करने के लिए खट्टे फलों जैसे संतरा, मौसमी आदि का सेवन फायदेमंद है। खट्टे फलों में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो सूजन को कम करते, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाते और खून को गाढ़ा होने से रोकते हैं।</p>



<ol start="5" class="wp-block-list">
<li><strong>अनार</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">अनार के बीज नाइट्रेट और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं जो ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देते हैं। अनारा खाने से मस्तिष्क, हृदय, मांसपेशियों और शरीर के अलग-अलग अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आप खून गाढ़ा होने के लक्षणों को महसूस करते हैं, तो किसी भी प्रकार का आयुर्वेदिक उपाय अपनाने से पूर्व आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लेखक के बारे में</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आप कैंसर, मधुमेह, अस्थमा, किडनी, गठिया रोग, ब्लड प्रेशर, गेस्ट्रिक, लीवर या किसी अन्य समस्या से ग्रसित है तो भीलवाड़ा के रायला स्थित <strong><a href="https://shreenavgrahaashram.org/">श्री नवगृह आश्रम</a></strong> अवश्य पधारें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्री नवगृह आश्रम में कई रोगों का आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार किया जाता है। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए सम्पर्क करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोबाइल नम्बर : +91 844 844 9569, +91 7665555755, +91 7023062755</p>



<p class="wp-block-paragraph">पता: श्री नवगृह आश्रम, ग्राम &#8211; मोती बोर का खेड़ा, ग्राम पंचायत &#8211; रायला, जिला भीलवाड़ा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>क्या कैंसर रोगी कैंसर के इलाज में एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयों का साथ में सेवन कर सकता है?</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/can-we-take-ayurvedic-and-allopathic-medicine-together-for-cancer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Aug 2024 13:05:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Cancer News]]></category>
		<category><![CDATA[कैंसर रोगी कैंसर के इलाज में एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयों का साथ में सेवन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shreenavgrahaashram.org/?p=10100</guid>

					<description><![CDATA[<p>कैंसर एक गंभीर और जटिल रोग है, जिससे दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित हैं। कैंसर को नियंत्रण में लाने के लिए सही समय पर उचित उपचार की आवश्यकता होती है। कैंसर के पारंपरिक उपचारों में एलोपैथिक उपचार जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी आदि शामिल हैं। एलोपैथिक उपचार जीवनरक्षक हो सकता है, लेकिन इनके कई दुष्प्रभाव भी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कैंसर एक गंभीर और जटिल रोग है, जिससे दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित हैं। कैंसर को नियंत्रण में लाने के लिए सही समय पर उचित उपचार की आवश्यकता होती है। कैंसर के पारंपरिक उपचारों में एलोपैथिक उपचार जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी आदि शामिल हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">एलोपैथिक उपचार जीवनरक्षक हो सकता है, लेकिन इनके कई दुष्प्रभाव भी होते हैं। इस कारण से, कई कैंसर रोगी अपने एलोपैथिक उपचार के साथ-साथ <strong>आयुर्वेद उपचार</strong> भी शुरू करना चाहते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में वे दोनों उपचार एक साथ अपनाने से डरते हैं। ऐसे में आज हम इस आर्टिकल में दोनों पद्धतियों का एक साथ उपयोग संभव है या नहीं, इसके बारे में बताएंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कैंसर रोग क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कैंसर शरीर में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से उत्पन्न होने वाला एक रोग है। सामान्य रूप से शरीर की कोशिकाएं नियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं, लेकिन कैंसर में यह प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाती है, जिससे शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या ट्यूमर बन जाता है, जो धीरे-धीरे अन्य अंगों में फैल सकता है। इसे ही कैंसर कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कैंसर रोग कितने प्रकार का होता है?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>कार्सिनोमा:</strong> यह सबसे सामान्य प्रकार का कैंसर है, जो त्वचा या आंतरिक अंगों की ऊपरी सतह पर होता है।</li>



<li><strong>सार्कोमा: </strong>यह हड्डियों, मांसपेशियों, वसा, और रक्त वाहिकाओं में उत्पन्न होने वाला कैंसर है।</li>



<li><strong>ल्यूकेमिया: </strong>यह कैंसर रक्त और अस्थि मज्जा में होता है, जहां रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।</li>



<li><strong>लिम्फोमा और <a href="https://www.pavtan.com/blog/multiple-myeloma-cancer-ka-ayurvedic-ilaj/">मायलोमा</a>:</strong> यह कैंसर प्रतिरक्षा प्रणाली के अंगों में उत्पन्न होता है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">कैंसर रोग का एलोपैथिक इलाज क्या है?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>सर्जरी:</strong> यह प्रक्रिया कैंसर की कोशिकाओं या ट्यूमर को हटाने के लिए अपनाई जाती है।</li>



<li><strong>कीमोथेरपी:</strong> इस प्रक्रिया में विशेष प्रकार की दवाइयों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।</li>



<li><strong>रेडियोथेरपी:</strong> इस प्र​क्रिया में उच्च ऊर्जा की किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।</li>



<li><strong>इम्यूनोथेरपी और टार्गेटेड थेरपी:</strong> ये नवीनतम तकनीकें हैं, जो कैंसर के खिलाफ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाती हैं।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">कैंसर का आयुर्वेदिक उपचार क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेद एक प्राचीनतम भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जिसमें जड़ी-बूटियों, आहार, और जीवनशैली के माध्यम से रोगों का उपचार किया जाता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाइयों और उपायों को कैंसर के इलाज में भी प्रभावी माना गया है, जो इस प्रकार हैं। 
</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>अश्वगंधा:</strong> यह एक प्रभावी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो तनाव को कम करने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है। इसे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में भी सहायक माना गया है।</li>



<li><strong>हल्दी:</strong> हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास, और उसे फैलने से रोकने में सहायक है।</li>



<li><strong>गोक्षुरा:</strong> यह महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे गोखरू के नाम से भी जाना जाता है। यह मूत्राशय और गुर्दों से संबंधित कैंसर के इलाज में सहायक मानी गई है।</li>



<li><strong>त्रिफला:</strong> यह एक आयुर्वेदिक औषधी है, जिसमें आंवला, बिभीतक और हरितकी का मिश्रण होता है। यह पाचन को सुधारने, शरीर को डिटॉक्सिफाई करने और प्रतिरक्षा को बढ़ाने में सहायक है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">क्या कैंसर रोग के इलाज में एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन कर सकते हैं?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कैंसर के इलाज के दौरान एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयों का साथ में सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। एलोपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयां दोनों ही अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका साथ में सेवन डॉक्टर के परामर्श के बगैर नहीं करना चाहिए। </p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आप एलोपैथी के साथ <strong>आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन</strong> करना चाहते हैं, तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। यह आपको डॉक्टर की बेहतर बता पाएंगे कि दोनों का साथ में सेवन आपकी सेहत पर किस प्रकार का प्रभाव डालता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उपरोक्त आर्टिकल कैंसर के एलोपैथी और आयुर्वेदिक उपचार के संबंध में जानकारी के लिए लिखा गया है। किसी भी प्रकार का उपचार शुरू करने से पूर्व विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।</p>
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		<title>प्रोस्टेट की समस्या को जड़ से खत्म करने का आयुर्वेदिक उपचार क्या है?</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/prostate-ki-samasya-ka-ayurvedic-upchar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jul 2024 11:58:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[प्रोस्टेट की समस्या को जड़ से खत्म करने का आयुर्वेदिक उपचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज के समय में न चाहते हुए भी हम किसी न किसी विकार से ग्रसित हो ही जाते हैं। ऐसा ही एक विकार प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ा हुआ है। जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि के अधिक विकसित होने या उसके बढ़ जाने से व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याएं हो जाती हैं। आज के आर्टिकल में हम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आज के समय में न चाहते हुए भी हम किसी न किसी विकार से ग्रसित हो ही जाते हैं। ऐसा ही एक विकार प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ा हुआ है। जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि के अधिक विकसित होने या उसके बढ़ जाने से व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याएं हो जाती हैं। आज के आर्टिकल में हम इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्या क्या होती है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोस्टेट की समस्या आमतौर पर पुरुषों में होती है, और उम्र के साथ साथ इसकी संभावना और अधिक बढ़ जाती है। प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुषों की प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, जो वीर्य के एक भाग का उत्पादन करती है। जब यह ग्रंथि बढ़ती है, या इसमें सूजन होती है, तो इससे विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट ग्रंथि क्या होती है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोस्टेट शरीर में मौजूद एक ग्रंथि है, जिसे &#8216;<strong>पौरुष ग्रंथि</strong>&#8216; भी कहा जाता है। यह एक द्रव पदार्थ का उत्पादन करती है, जो स्खलन के दौरान शुक्राणुओं को ले जाने का कार्य करता है। पौरुष ग्रंथि मूत्रमार्ग के चारों ओर स्थित होती है। प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का मतलब इसके अधिक विकसित होने से लगाया जाता है। <strong>प्रोस्टेट ग्रंथि</strong> उम्र के साथ साथ बढ़ती है, जिससे मूत्राशय से मूत्र का प्रवाह अवरूद्ध हो जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्याएं क्या क्या होती है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH): यह एक सामान्य स्थिति होती है, जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से मूत्र नली पर दबाव पड़ता है, और मूत्र संबंधी समस्याएं होती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोस्टेटाइटिस: प्रोस्टेट की सूजन को प्रोस्टेटाइटिस कहा जाता है, यह संक्रमण या अन्य कारणों से होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोस्टेट कैंसर: यह प्रोस्टेट ग्रंथि में उत्पन्न होने वाला कैंसर है, जो अधिक उम्र के पुरुषों में देखने को मिलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्याओं के लक्षण क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रोस्टेट की समस्याओं के लक्षण निम्नलिखित हैं।</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पेशाब करने में कठिनाई।</li>



<li>बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता।</li>



<li>रात को बार-बार पेशाब आना।</li>



<li>पेशाब में खून आना।</li>



<li>पेशाब के दौरान जलन या दर्द।</li>



<li>नीचले पेल्विक क्षेत्र में दर्द।</li>



<li>वीर्य में खून आना।</li>



<li>नींद में पेशाब आ जाना।</li>



<li>पेशाब कंट्रोल नहीं कर पाना।</li>



<li>पेशाब के रंग व गंध में बदलाव।</li>



<li>यौन क्रियाओं में समस्याएं आदि।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्याओं के कारण क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रोस्टेट की समस्याओं के कारण निम्नलिखित है।</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>उम्र का बढ़ना:</strong> उम्र के साथ साथ प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से भी यह समस्या होती है।</li>



<li><strong>हॉर्मोनल परिवर्तन:</strong> टेस्टोस्टेरोन और अन्य हॉर्मोन में बदलाव होना।</li>



<li><strong>जेनेटिक :</strong> परिवार में प्रोस्टेट की समस्या होना।</li>



<li><strong>जीवनशैली और आहार:</strong> असंतुलित जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर आहार का सेवन।</li>



<li><strong>संक्रमण:</strong> बैक्टीरियल संक्रमण।</li>



<li><strong>अन्य स्वास्थ्य समस्याएं:</strong> मोटापा, <strong><a href="https://shreenavgrahaashram.org/diabetes-ka-ayurvedic-ilaj/">मधुमेह</a></strong>, और <strong><a href="https://shreenavgrahaashram.org/high-blood-pressure-ka-ayurvedic-ilaj/">हाई बीपी</a></strong> आदि।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोस्टेट की समस्या के लिए आयुर्वेदिक में कुछ उपायों और जड़ी बुटियों के बारे में बताया गया है। जीवनशैली में बदलाव और आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से इस समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार इस प्रकार है।</h3>



<h4 class="wp-block-heading">शिलाजीत:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">शिलाजीत प्रोस्टेट स्वास्थ्य को सुधारने में मददगार है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है, और सूजन को कम करता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">त्रिफला:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">त्रिफला आंवला, बहेड़ा, हरड़ का मिश्रण होता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। यह पाचन तंत्र को सुधारता है, और प्रोस्टेट स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">गोखरू:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">गोखरू प्रोस्टेट की सूजन को कम करता है, और मूत्र संबंधी समस्याओं में सुधार करता है। यह मूत्र प्रणाली के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">पुनर्नवा:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">पुनर्नवा मूत्रवर्धक गुणों से युक्त होता है, और प्रोस्टेट की सूजन को कम करने में सहाय​क है।<br>यह मूत्र प्रणाली की सफाई करता है, और संक्रमण को रोकता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">अश्वगंधा:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">अश्वगंधा तनाव को कम करने और हॉर्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मददगार है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">कांचनार गुग्गुल:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">कांचनार गुग्गुल प्रोस्टेट की सूजन को कम करने में काम में लिया जाता है। यह लसीका तंत्र को सुधारता है, और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रोस्टेट की समस्या को खत्म करने के अन्य उपाय</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>संतुलित आहार का सेवन।</li>



<li>जीवनशैली में बदलाव।</li>



<li>पर्याप्त मात्रा में पानी पिए।</li>



<li>नियमित व्यायाम व ध्यान आदि।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">उपरोक्त आर्टिकल में आपने <strong>प्रोस्टेट की समस्या</strong>, इसके लक्षणों, कारणों और <strong>आयुर्वेदिक उपचार</strong> के बारे में जाना। यह आर्टिकल प्रोस्टेट की सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है। <strong>प्रोस्टेट की समस्या</strong> होने पर डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। कोई भी आयुर्वेदिक उपचार शुरू करने से पूर्व भी चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।</p>
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		<title>क्या आपको भी हर समय डर और घबराहट सी रहती है? जानिए इससे छुटकारे के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में!</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/anxiety-se-chutkara-pane-ke-ayurvedic-upay/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jul 2024 07:35:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[एंग्जायटी से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>क्या आपने कभी एकाएक डर और घबराहट महसूस की है? किसी बात की चिंता या विचार से कभी आपने ऐसा महसूस किया हो? संभव है कि कुछ दिनों या सप्ताह के लिए आप इस समस्या से गुजरे हो या फिर अगर आप ऐसे किसी अनुभव से नहीं गुजरे हैं, तो यह अच्छी बात है। आज [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">क्या आपने कभी एकाएक <strong>डर और घबराहट</strong> महसूस की है? किसी बात की चिंता या विचार से कभी आपने ऐसा महसूस किया हो? संभव है कि कुछ दिनों या सप्ताह के लिए आप इस समस्या से गुजरे हो या फिर अगर आप ऐसे किसी अनुभव से नहीं गुजरे हैं, तो यह अच्छी बात है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज के समय में शारीरिक के साथ मानसिक विकार बहुत आम होता जा रहा है। भागदौड़ भरी जिन्दगी, आर्थिक समस्या, तनाव, चिंता आदि कारणों से मन से जुड़े विकार बढ़ रहे हैं। मानसिक विकार किसी को भी हो सकते हैं, ये विकार शारीरिक समस्याओं के भी कारण बनते हैं। ऐसी ही एक समस्या का नाम है व्यक्ति को हर समय डर एवं घबराहट रहना।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सामान्य शब्दों में हर समय डर एवं घबराहट रहना एंग्जाइटी का लक्षण है। आज के इस आर्टिकल में हम हर समय डर एवं घबराहट के कारणों, लक्षणों और इससे छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में जानेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हर समय डर और घबराहट क्यों होती है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हर समय डर और घबराहट को एंग्जायटी डिसऑर्डर कहा जाता है, यह एक मानसिक बीमारी है, जिसमें मरीज को बेचैनी के साथ घबराहट, चिंता, डर और नकारात्मक विचार आते हैं। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया जाता है, तो यह गंभीर हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एंग्जाइटी के लक्षण क्या होते हैं?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एंग्जाइटी के लक्षण निम्नलिखित है:-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हर समय बेचैनी</li>



<li>घबराहट</li>



<li>नींद नहीं आना</li>



<li>सांस लेने में तकलीफ</li>



<li>काम में मन न लगना</li>



<li>अचानक दिल की धड़कन बढ़ना</li>



<li>नकारात्मक विचार आना</li>



<li>थकान और कमजोरी</li>



<li>जी मिचलाना</li>



<li>पाचन से जुड़ी समस्या</li>



<li>चक्कर आना</li>



<li>अधिक पसीना आना</li>



<li>हाथ-पैर का ठंडा होना</li>



<li>हाथ-पैरों में सुन्न या झुनझुनाहट</li>



<li>स्थिर से बैठने में समस्या</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">एंग्जायटी के कारण क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एंग्जायटी या हर समय डर और घबराहट महसूस होने के कारण निम्न​लिखित हैं।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तनाव और चिंता: </strong>बहुत अधिक तनाव या चिंता करना हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव डालता है, जिससे भी डर और घबराहट हो सकती है</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डिप्रेशन: </strong>अवसाद या डिप्रेशन भी डर और घबराहट का कारण है। डिप्रेशन में व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो जाता है, और उसे हर समय नकारात्मक विचार आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फोबिया:</strong> कुछ विशेष परिस्थितियों या वस्तुओं का डर (फोबिया) भी हर समय घबराहट का कारण हो सकता है। एंग्जायटी में यह समस्या आम है, जैसे मृत्यु का डर आदि।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>व्यक्तिगत समस्याएं:</strong> व्यक्तिगत या परिवार की समस्याएं भी चिंता और डर का कारण बनती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शारीरिक कारण:</strong> कुछ शारीरिक समस्याएं जैसे थायरॉयड डिसऑर्डर, हॉर्मोनल असंतुलन, या अन्य चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी व्यक्ति एंग्जायटी का ​शिकार हो जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आहार और जीवनशैली: </strong>अस्वस्थ आहार, अपर्याप्त नींद, और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण भी एंग्जायटी की समस्या देखने को मिलती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नशीली दवाओं का सेवन:</strong> शराब, धूम्रपान, या अन्य नशीली दवाओं का सेवन भी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एंग्जायटी से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एंग्जायटी से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। यहां हम आपको कुछ आयुर्वेदिक उपाय बताने जा रहे हैं, जो एंग्जायटी से छुटकारा पाने में मददगार साबित हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अश्वगंधा: </strong>अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो तनाव और एंग्जायटी को कम करने में मदद करती है। इसे रोजाना सेवन करने से मानसिक शांति मिलती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्रह्मी:</strong> ब्रह्मी मस्तिष्क की कार्य प्रणाली बेहतर बनाने के लिए जानी जाती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जटामांसी: </strong>जटामांसी एक प्राकृतिक शामक है, जो मानसिक तनाव और एंग्जायटी को कम करने में मदद करती है। इसका सेवन करने से नींद भी अच्छी आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>च्यवनप्राश:</strong> च्यवनप्राश में कई जड़ी-बूटियाँ होती हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती हैं और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तुलसी:</strong> तुलसी के पत्तों का सेवन करने से मानसिक शांति मिलती है, और एंग्जायटी कम होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शिरोधारा:</strong> शिरोधारा एक आयुर्वेदिक उपचार है, जिसमें माथे पर धीरे-धीरे तेल डाला जाता है। यह उपचार मानसिक शांति और तनाव में राहत प्रदान करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अरोमाथेरेपी:</strong> लैवेंडर, चंदन, और अन्य सुगंधित तेलों का उपयोग करने से मन शांत होता है, और एंग्जायटी में कमी आती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अच्छी नींद: पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संतुलित आहार</strong>: आयुर्वेद में आहार का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। ताजे फल, सब्जियाँ, और संतुलित आहार का सेवन करने से भी मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>योग और प्राणायाम:</strong> नियमित योग और प्राणायाम का अभ्यास करने से मानसिक तनाव और एंग्जायटी में कमी आती है। विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, और शवासन बहुत प्रभावी होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन उपायों को अपनाने से एंग्जायटी से राहत मिल सकती है, हालांकि इन उपायों को अपनाने से पूर्व आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।</p>
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		<title>क्या ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन का आयुर्वेदिक दवा में कोई सटीक उपचार है?</title>
		<link>https://shreenavgrahaashram.org/blood-urea-and-creatinine-ko-control-karne-ka-ayurevdic-upchar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Jun 2024 10:17:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ayurvedic Treatment]]></category>
		<category><![CDATA[ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन नियंत्रित रखने के आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shreenavgrahaashram.org/?p=10070</guid>

					<description><![CDATA[<p>आजकल की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हम अपना ख्याल नहीं रख पाते हैं, और न चाहते हुए भी किसी न किसी शारीरिक समस्या से ग्रसित हो जाते हैं। इनमें कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जो स्वत: ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ ऐसी समस्याएं भी होती हैं, जिन पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आजकल की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हम अपना ख्याल नहीं रख पाते हैं, और न चाहते हुए भी किसी न किसी शारीरिक समस्या से ग्रसित हो जाते हैं। इनमें कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जो स्वत: ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ ऐसी समस्याएं भी होती हैं, जिन पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो ये गंभीर हो सकती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसी ही एक शारीरिक समस्या या विकार का नाम है ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन का बढ़ जाना! आज के इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में जानेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्रिएटिनिन क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">क्रिएटिनिन एक रासायनिक अपशिष्ट है, जो हमारी मांसपेशियों की गतिविधि के दौरान क्रिएटिन नामक यौगिक के टूटने से बनता है। इसे मुख्यतः किडनी द्वारा रक्त से फिल्टर किया जाता है और मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकाला जाता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के खून में पाया जाता है। हमारे खून में क्रिएटिनिन की मात्रा स्थिर रहती है। अगर यह बढ़ जाए तो किडनी को खराब कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सामान्य क्रिएटिनिन का स्तर कितना होता है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के अनुसार पुरुषों में यह लगभग 0.6 से 1.2 मिलीग्राम/डीएल (मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर) होना चाहिए। महिलाओं में यह लगभग 0.5 से 1.1 मिलीग्राम/डीएल होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्लड यूरिया क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ब्लड यूरिया (Blood Urea) एक महत्वपूर्ण जैविक पदार्थ है, जो खून में पाया जाता है। यह यूरिया नामक यौगिक का हिस्सा होता है, जो प्रोटीन के मेटाबोलिज्म के दौरान लीवर में बनता है। यूरिया खून से किडनी द्वारा फिल्टर होकर मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किडनी में ब्लड यूरिया कितना होना चाहिए?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">किडनी की सामान्य कार्यक्षमता के लिए रक्त में यूरिया का स्तर एक निश्चित सीमा के भीतर होना चाहिए। यह स्तर व्यक्ति की उम्र, आहार, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य कारकों पर निर्भर कर सकता है। सामान्यतः, रक्त यूरिया नाइट्रोजन (Blood Urea Nitrogen, BUN) का स्तर निम्नलिखित होता है:</p>



<h4 class="wp-block-heading">सामान्य ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) स्तर:</h4>



<p class="wp-block-paragraph">वयस्क: 7 से 20 मिलीग्राम/डेसीलीटर (mg/dL)<br>बच्चे: 5 से 18 मिलीग्राम/डेसीलीटर (mg/dL)</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्रिएटिनिन और यूरिया में क्या अंतर है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">क्रिएटिनिन और यूरिया दोनों ही शरीर के अपशिष्ट हैं, जो विभिन्न मेटाबोलिक प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं और मुख्यतः किडनी द्वारा रक्त से फिल्टर किए जाते हैं। हालांकि, इन दोनों के उत्पादन, कार्य और महत्व में कुछ अंतर जरूर होता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">ब्लड यूरिया बढ़ने के लक्षण</h4>



<p class="wp-block-paragraph">बार-बार पेशाब आना।<br>उल्टी आना।<br>भूख की कमी।<br>कमजोरी महसूस होना।<br>ब्लड प्रेशर का बढ़ना या कम होना।<br>कमजोरी एवं थकान होना आदि।</p>



<h4 class="wp-block-heading">क्रिएटिनिन बढ़ने के लक्षण</h4>



<p class="wp-block-paragraph">थकान महसूस होना।<br>अनियमित हार्ट रेट।<br>मतली और उल्&#x200d;टी।<br>सांस लेने में तकलीफ।<br>मांसपेश&#x200d;ियों में दर्द होना।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन कम करने का आयुर्वेदिक उपचार क्या है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन के स्तर को नियंत्रित करने के लिए कुछ उपचार बताए गए हैं। हम आपको कुछ ऐसी जड़ी बुटियों के बारे में ​बताएंगे, जिनका उपयोग ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन को कम करने में सहाय​क हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोखरू (Tribulus terrestris): गोखरू किडनी फंक्शन को सुधारने में सहायक होता है, और यूरिनरी सिस्टम को मजबूती प्रदान करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पुनर्नवा (Boerhavia diffusa): पुनर्नवा का आयुर्वेद में बहुत महत्व है, यह किडनी की सफाई और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन के स्तर को कम करने में भी सहायक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गिलोय (Tinospora cordifolia): गिलोय एक इम्यून बूस्टर है और किडनी फंक्शन को सुधारने में मददगार माना गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वरुण (Crataeva nurvala): वरूण किडनी स्टोन और यूरिनरी डिसऑर्डर्स के इलाज में उपयोगी है, और किडनी की कार्यप्रणाली में भी सुधार करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चंद्रप्रभा वटी: यह आयुर्वेदिक दवा कई जड़ी बुटियों का मिश्रण होती है, और किडनी की कार्यक्षमता को सुधारने में सहायक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">त्रिफला: त्रिफला का सेवन पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नीम और हल्दी: नीम और हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता को सुधारने में सहायक हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन नियंत्रित रखने के सामान्य उपाय?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>नमक और प्रोटीन का सेवन सीमित करें।</li>



<li>पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।</li>



<li>धूम्रपान और शराब से बचें।</li>



<li>योग और प्राणायाम करें।</li>



<li>स्वस्थ एवं संतुलित आहार का सेवन।</li>



<li>दवाओं का सीमित उपयोग आदि।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">इस आर्टिकल में आपने ब्लड यूरिया एवं क्रिएटिनिन के बारे में विस्तार से जाना। यह आर्टिकल इस समस्या से संबंधित जानकारी के लिए लिखा गया है। अगर आप उपरोक्त समस्या से ग्रसित है, तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।</p>
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